दैनिक वेतन भोगी नियमितीकरण के मामले भारी पड़ी अवमानना, पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर को हाईकोर्ट का आदेश नही माना, डीई के साथ 1 लाख का जुर्माना

जबलपुर. दैनिक वेतन भोगियों के नियमितीकरण के मामले में हाईकोर्ट का आदेश न मानना पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर को महंगा पड़ गया। न्यायालय ने कहा था कि दैनिक वेतन भोगी को जब स्थाई कर्मी बना दिया गया है तो उनके नियमितीकरण के लिये उमादेवी प्रकरण के तहत कार्यवाही करें। ऐसा करने के बाद न्यायालय ने इसकी रिपोर्ट भी मांगी थी, तो इस पर मुख्य अभियंता एससी वर्मा ने बगैर विचार करें। कम्प्लाइंस रिपोर्ट पेश कर दी कि सभी दैनिक वेतन भोगियों को नियमित किया जा चुका है।
इस पर मंगलवार को हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक अग्रवाल ने हाईकोर्ट का आदेश न मानने पर अपर मुख्य सचिव पीडब्ल्यूडी को चीफ इंजीनियर को 3 माह में विभागीय जांच कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिये और साथ ही चीफ इंजीनियर पर एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया है। यह पहला मामला है जब किसी चीफ इंजीनियर पर जुर्माना लगाया है और इसकी विभागीय जांच कर रिपोर्ट मांगी है। हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पीडब्ल्यूडी के प्रभारी ईएनसी केपीएस राणा को हाईकोर्ट ने तलब किया है।
चीफ इंजीनियर पर कार्यवाही, 3 माह में पूरी करनी है जांच
जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने अदालत से धोखाधड़ी व गुमराह करने पर विभाग के मुख्य अभियंता के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिये है। हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी के एसीएस को निर्देश दिये है कि 3 माह में जांच पूरी कर हाईकोर्ट रजिस्ट्री में रिपोर्ट पेश करें। हाईकोर्ट ने मुख्य अभियंता पर एक लाख रूपये की कॉस्ट भी लगाई जो उन्हें अपनी जेब से देनी होगी। जुर्माने की यी राशि हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी जबलपुर के खाते में जमा करने के निर्देश दिये है। हाईकोर्ट ने 2 सप्ताह के अन्दर पूर्व का आदेश का पालन करने के निर्देश भी दिये। हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि आदेश का पालन नहीं होगा तो अगली सुनवाई के दौरान इंजीनियर इन चीफ पुनः हाजिर रहेंगे।
बालाघाट निवासी कृष्णकुमार ठकरेले समेत 6 अन्य की तरफ से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा व शिवम वर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने 7 अक्टूबर 2016 की नीति के स्थान पर उमादेवी के न्यायदृष्टांत के अनुरूपा नियमितीकरण का लाभ दिये जाने के निर्देश दिये थे। इस मामले में चीफ इंजीनियर एससी वर्मा ने 19 सितम्बर 2024 को आदेश जारी कर कहा है कि याचिकाकर्त्ता नियमितीकरण की पात्रता नहीं रखते है। चीफ जस्टिस ने वित्त विभाग के एक परिपत्र का हवाला देते हुए कहा है कि सभी दैनिक वेतन भोगियों को नियमित कर दिया है। हाईकोर्ट ने इस जवाब का अवलोकन करने के बाद पाया कि अधिकारी गुमराह और धोखा दे रहे है। ब्लाइंडफोल्ड नहीं कर सकते हैं काम।
आंखों पर पट्टी बांधकर काम नहीं कर सकते
हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत आंखों पर पट्टी बांधकर काम नहीं कर सकती। चीफ इंजीनियर ने अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया है, इससे अदालत की गरिमा प्रभावित होती है। सीई ने कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर धोखाधड़ी की है। अधिकारी के ऐसे कदाचरण की जांच होना जरूरी है।